Secure Sdlc Phases

क्या है SDLC?

नमस्कार दोस्तों में आपको सॉफ्टवेर सेक्टर की जानकारी देने जा रहा हु. SDLC प्रोसेस मॉडल के बारे में जानकारी दूंगा जब सॉफ्टवेर डेवलपमेंट किया जाती है. तब इस मॉडल का उपयोग किया जाता है. SDLC का मतलब होता है. SOFTWARE DEVELOPMENT LIFE CYCLE होता है. क्या आप जानते है. सॉफ्टवेर विकसित करने में SDLC प्रोसेस बड़ा योगदान रहता है. आज हम डिजिटल युग में रहते है. सॉफ्टवेर और ARTIFICAL INTELLGENT का जमाना है. सब सेक्टर में सॉफ्टवेर का उपयोग किया जाता है. अब लोगो का मोबाइल और कंप्यूटर के बिना हमारा जीवन अधुरा है. SDLC मॉडल में फाइव STAGES होते है. कुछ में ज्यादा भी हो सकते है. इस मॉडल का उपयोग प्रोजेक्ट प्लानिंग अनुमान लगाने और आदान प्रदान करने  के लिए करते है.

SDLC मॉडल  के प्रकार

  • WATERFALL MODEL
  • V  MODEL
  • PROTOTYPE MODEL
  • SPIRAL MODEL
  • HYBRID MODEL
  • AGILE MODEL

WATERFALL MODEL

WATERFALL MODEL :-  वाटरफॉल मॉडल एक शुरुवाती  एक SEQUETIAL MODEL है. इसका मतलब अपने पहले PHASE काम करना चालू किया तो DEVELOPEMENT पूरा करना पड़ता है. नहीं तो अगला फेज आप चालू नहीं  कर सकते है. वाटर फॉल मॉडल में आप कोई  भी  फेज ओवर लैप नहीं कर सकते है. वाटर फॉल मॉडल में पहला फेज निचे फेज पर  गिरता है. किसी भी बड़े प्रोजेक्ट के लिए वाटर फॉल मॉडल पर काम करना अच्छा नहीं होता है. काम्पेल्क्स प्रोजेक्ट के  लिए यह मॉडल अच्छा नहीं साबित होता है. रिस्क फैक्टर ज्यादा होने के कारन यह अच्छा नहीं है. प्रोजेक्ट के  लिए अच्छा नहीं क्योकि REQUIREMENT में अक्सर बदलाव  करना पड़ता है. छोटे प्रोजेक्ट  के लिय वाटर फॉल मॉडल का उपयोग किया जाता है. वाटर फॉल मॉडल में वह अच्छे से काम करता  है. इसलिए वॉटरफॉल मॉडल में छोटे प्रोजेक्ट के लिए रिजल्ट भी अच्छे मिलते है. वॉटरफॉल मॉडल पर फाइनल प्रोडक्ट और डिलीवरी देर से होता है. कारन इसमें कोई प्रोटोटाइप नहीं होता है.

वॉटरफॉल मॉडल के उपयोग

  • वॉटरफॉल मॉडल समजने में आसान होते है. और इसका उपयोग छोटे प्रोजेक्ट के लिए किया जाता है.
  • वॉटरफॉल मॉडल में RIGIDITY कारण  REQUIREMENT MANEGEMENT बहोत  आसान होता है. हर एक फेज में रिव्यु प्रोसेस होता है.
  • वाटर फॉल मॉडल यह एक स्टेज डिफाइन है. इसके कार्यो का व्यवस्थापन करना इसमे आसन होता है.
  • स्माल प्रोजेक्ट के लिए अच्छे से काम करता है. और जहा ज्यादा अवश्यकता है वहा बहोत अच्छे समज जाता है.
  • पुरे फेज को पूरा किया जाता है. और एक समय  पूरा किया जाता है.
  • वॉटरफॉल मॉडल में प्रक्रिया अच्छी तरह से DOCUMENTED होती  है. वॉटरफॉल मॉडल के फाइव फेज होते है. वह हम आगे देखेंगे.

वॉटरफॉल मॉडल के फाइव फेज

  • REQUIREMENT PHASE
  • DESING PHASE
  • IMPLEMENTATION PHASE
  • VERIFICATION PHASE
  • MAINTENCE PHASE

REQUIREMENT PHASE

इस फेज में सिस्टम की सभी REQUIREMENT एक जगह पर रखते है. और उसके डॉक्यूमेंट तयार किये जाते है. और यह सब डॉक्यूमेंट सावधानी के साथ स्टोर किये जाते है. इसका कारन यह है की पहले फेज पर दूसरा फेज आधारित होता है.

DESIGN PHASE

डिजाईन फेज के पहले चरण में सब डॉक्यूमेंट का अवश्यक स्पेसिफिकेशन का स्टडी किया जाता है. और इसका उपयोग करके सिस्टम का डिजाईन तयार किया जाता है. यह सिस्टम एसा होता है की सिस्टम डिजाईन हार्डवेयर और सिस्टम आवश्यता को SPECIFY करने में मदत करता है.  यह सब सिस्टम आर्किटेक्चर को डिफाइन करने में मदत करता है.

IMPLEMENTATION PHASE

यह फेज में सिस्टम को डिजाईन इनपुट  किया जाता  है. उसके साथ सिस्टम को छोटे छोटे प्रोग्राम में develope किया जाता है. उसको  यूनिट कहा जाता है. वह अगले फेज में INTIGRATE होते है. सभी हार्डवेयर और सॉफ्टवेर एप्लीकेशन को इनस्टॉल किया जाता है. और उसे विकसित करके उसकी क्षमता को परीक्षित किया जाता है. उसको इकाई परीक्षण  कहा जाता है.

VERIFICATION PHASE

इस फेज में सॉफ्टवेर टेस्टिंग की जाती है. और सॉफ्टवेर के सभी  पार्ट्स को चेक किया जाता है. और VERIFY किया जाता है. इसी तरह सॉफ्टवेर इवैल्यूएशन किया  जाता है. इसी तरह सॉफ्टवेर में कोई error और bug रहता है. इसका अच्छे से वेरिफिकेशन किया जाता है. अच्छे वेरिफिकेशन किया गया नहीं तो सॉफ्टवेर फ़ैल होने का रिस्क बना रहता है.

MAINTENANCE PHASE

इस फेज पूरा सिस्टम तयार होता है. और सभी  यूजर उसका इस्तेमाल उपयोग करना शुरू करते है. तब यह सॉफ्टवेर बिना किसी टाइम डाउन के साथ करता है  की  नहीं इस पर ध्यान दिया जाता है.  और इसमें सिस्टम  को अपडेट करना. और कस्टमर के फीडबैक पर काम करना होता है. आशा करता हु यह ब्लॉग आपको पसंद आया होगा. मेरे पोस्ट के प्रति अपनी प्रसन्नता  और उसुकता को दर्शाने के लिए कृपया इस पोस्ट को सोशल नेटवर्क पर शेर जरुर की जिए.